शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद जी का करारा संदेश: सोशल मीडिया पर गाली देने वालों को आईना दिखाया
शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद जी का करारा संदेश: सोशल मीडिया पर गाली देने वालों को आईना दिखाया आज का युग सोशल मीडिया का है, जहाँ हर व्यक्ति को अपनी बात कहने की पूरी आज़ादी है। लेकिन दुर्भाग्य से यह आज़ादी कई बार अशब्दों, गालियों और असहिष्णुता में बदल जाती है। इसी संदर्भ में शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी का एक बयान इन दिनों चर्चा में है, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पर गाली देने वालों और तथाकथित हिंदूवाद के नाम पर अपमान फैलाने वालों को कड़ा संदेश दिया।
आज का युग सोशल मीडिया का है, जहाँ हर व्यक्ति को अपनी बात कहने की पूरी आज़ादी है। लेकिन दुर्भाग्य से यह आज़ादी कई बार अशब्दों, गालियों और असहिष्णुता में बदल जाती है। इसी संदर्भ में शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी का एक बयान इन दिनों चर्चा में है, जिसमें उन्होंने सोशल मीडिया पर गाली देने वालों और तथाकथित हिंदूवाद के नाम पर अपमान फैलाने वालों को कड़ा संदेश दिया।
शंकराचार्य जी ने क्या कहा?
सोशल मीडिया पर गाली देने वालों को चेतावनी
शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद जी ने स्पष्ट कहा कि:
“चारों शंकराचार्य, पाँच वैष्णवाचार्य और तेरह अखाड़े सनातन धर्म की परंपरागत धरोहर हैं। इन सबकी उपेक्षा करके अगर कोई खुद को हिंदू सरकार कहता है तो यह सनातन धर्म का अपमान है।”
उन्होंने कहा कि भारत के इतिहास में धर्माचार्यों की ऐसी उपेक्षा और बेइज्जती पहले कभी नहीं हुई जैसी वर्तमान समय में हो रही है।
शंकराचार्य जी ने कहा कि
“आप लोग फेसबुक पर दो गालियाँ जितनी देनी हैं दे दो, लेकिन समय बताएगा कि आचार्य तुम्हारे हित की बात कह रहा था।”उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे न तो प्रशंसा से प्रभावित होते हैं और न ही निंदा से डरते हैं। उनका उद्देश्य केवल जनता को समय रहते सजग करना है।
असली हिंदुत्व क्या है?
शंकराचार्य जी के अनुसार हिंदुत्व का मतलब सिर्फ राजनीतिक नारा नहीं है, बल्कि
✔ धर्माचार्यों का सम्मान
✔ सनातन परंपराओं की रक्षा
✔ मर्यादित भाषा और व्यवहार
✔ सत्य के पक्ष में खड़े होना
यही असली हिंदुत्व है।
गाली देना, अपमान करना और सोशल मीडिया पर नफरत फैलाना हिंदू संस्कृति नहीं है।
सरकार और धर्माचार्य का संबंध
उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकार वास्तव में हिंदूवादी है तो
-
शंकराचार्यों की बात क्यों नहीं सुनी जाती?
-
अखाड़ों और आचार्यों को हाशिये पर क्यों रखा जाता है?
-
सनातन धर्म की संस्थाओं को निर्णय प्रक्रिया में क्यों नहीं शामिल किया जाता?
यह सवाल आज हर जागरूक नागरिक को सोचने पर मजबूर करते हैं।
इतिहास क्या मूल्यांकन करेगा?
शंकराचार्य जी ने कहा:
“इतिहास जब भविष्य में मूल्यांकन करेगा, तब यह नहीं आना चाहिए कि हमने सही बात समय पर जनता के सामने नहीं रखी।”
यही कारण है कि वे विरोध के बावजूद खुलकर बोल रहे हैं, चाहे लोग सुनें या न सुनें।
शंकराचार्य अभिमुक्तेश्वरानंद जी का यह संदेश केवल सरकार के लिए नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति के लिए है जो धर्म के नाम पर नफरत फैलाता है।
सनातन धर्म की रक्षा गाली से नहीं, गरिमा से होती है।
हमें चाहिए कि हम सोशल मीडिया को संवाद का माध्यम बनाएं, न कि विवाद का।
आप क्या सोचते हैं?
क्या आज के समय में धर्माचार्यों की उपेक्षा हो रही है?
क्या गाली देना हिंदुत्व का सही तरीका है?
अपनी राय नीचे कमेंट में जरूर लिखें।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें